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Microsoft Word

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  1. Microsoft Word : Microsoft word word processing application है जो आपको आपके text, graphics, tables तथा charts को format करने की अनुमति देती है। इसे आप start menu-programs-microsoft word पर जाकर सकते हैं। 2. Netscape rear Internet Explorer: Netscape तथा Internet Explorer का प्रयोग इन्टरनेट को एक्सेस करने के लिये होता है। इसे आप start menu-programs- internet explorer Netscape communicator open कर सकते हैं। 3. Windows Media Player : Window Media Player का प्रयोग गानों को सुनने के लिये होता है। इसे आप start menu-program-accessories—Enter- tainment-windows Media Player पर जाकर ओपन कर सकते हैं। 4. Calculator: यह Computer पर mathematical op- eration perform करने के काम आता है। Windows calculator का प्रयोग screen पर मौजूद cal- culator पर क्लिक करके या फिर keyboard से number type करके किया जाता है। इसे आप startmenu-programs accessories— calculator पर जाकर open कर सकते हैं। MS-OfficeWord Processing 1. Basic of Word Processing 1.1 परिचय - वर्ड प्रोसेसिंग एक एप्लीकेशन प्रोग्राम है जो आपक...

सन्देशवाहन की आधुनिक तकनीकें

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  संम्प्रेषण / सन्देशवाहन की आधुनिक तकनीकें आधुनिक युग में सम्प्रेषण की अनेक नई तकनीकें विकसित हो गई है जिनका भरपूर उपयोग किया जा रहा है। ऐसी कुछ प्रमुख तकनीकें निम्नानुसार है : :- 1 . इलैक्ट्रोनिक मेल या ई-मेल । 2. इन्टरनेट । 3. फेक्स। 4. वॉइस मेसेजिंग | 5. वीडियों कान्फ्रेन्सिग । 6. बेव साइट। 7. लेन । 8. मेन तथा वेन । 9. सैल्यूलर फोन । 1. इलैक्ट्रोनिक्स मेल या ई-मेल (Electronics mail or E- mail) : - ई-मेल सन्देश संम्प्रेषण की एक अत्यधिक प्रचलित आधुनिक तकनीक है। इस तकनीक से सन्देश भेजने हेतु ऐसे कम्प्यूटर का उपयोगके लिए सबसे पहले सन्देश ई-मेल बॉक्स में टाइप किया जाता है। करना होता है जिसमें इन्टरनेट सुविधा होती है। ई-मेल से सन्देश भेजने में अन्तरित किया जाता है। तत्पश्चात् जिस व्यक्ति या संस्था को भेजना होता है अत: संस्था के पते (e-mail address) को टाइप किया जाता 'उसे इन्टरनेट के माध्यम से इच्छित व्यक्ति या संस्था को है। सन्देश भेजने के साथ ही वह सन्देश प्राप्तकर्ता को इन्टरनेटयुक्त • कम्प्यूटर के ई-मेल बॉक्स में चला जाता है। जब प्राप्तकर्ता उस बॉक्स को खोलेगा तो वह उस सन्देश को द...

संम्प्रेषण (Communication)

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संम्प्रेषण (Communication ) :- दो या दो से अधिक व्यक्तियों 1 अपने संदेशो, भावनाओं, तथ्यों तथा विचारों को परस्पर विनिमयकरने को सम्प्रेषण कहा जाता है। संम्प्रेषण का अर्थ (Meaning of communication)- सम्प्रेषण लेटिन शब्द कमम्युनिस (Communis) से लिया गया है जिसका अर्थ - सामान्य "(Common) है। *कुछ विद्वानो ने संम्प्रेषण का आशय मात्र सूचनाएँ देने से लगाया *सरल भाषा में कहा जा सकता है कि "संम्प्रेषण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक सूचना एवं समझ के हस्तान्तरण की प्रक्रिया है।” * वेबस्टर शब्दकोश के अनुसार- संम्प्रेषण शब्दों, पत्रों अथवा सन्देशों द्वारा समागम, विचारों का विनिमय है। *उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि संम्प्रेषण एक सतत एवं सर्वव्यापक प्रक्रिया है जिसमें दो या अधिक व्यक्ति अपने सन्देशों, भावनाओं, सम्मतियों, तथ्यों तथा विचारों आदि का पारस्परिक विनिमय करते है। इसका प्रमुख उद्देश्य समझ पैदा करना है। संम्प्रेषण की आवश्यकता व महत्व (Need & Importance of communication )-सम्प्रेषण संगठन के विकास व संवर्धन हेतु अत्यन्त आवश्यक है। संप्रेषण से नियोजन, नियन्त्रण, नि...

(IT Literacy

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  (IT Literacy ) 1 .परिचय (Introduction): आज के युग को सूचना क्रान्ति का युग कहा जाता है और इस सूचना क्रांति का नायक है, कम्प्यूटर। हम सब किसी ना किसी रूप में कम्प्यूटर का प्रयोग कर रहे हैं जैसे प्रातः जिस अखबार को हम पढ़ते हैं उसकी टाइप सैटिंग, दूरदर्शन के कार्यक्रम, रेलगाड़ी/वायुयान आरक्षण, दूरभाष/बिजली/पानी आदि के बिल, विडियो गेम्स या विज्ञापनों में उछलते कूदते पात्र, चिकित्सा जाँच आदि सब में कम्प्यूटर का प्रयोग होता है। “संक्षेप में कम्प्यूटर द्वारा लाई हुई क्रान्ति से मनुष्य के जीवन में समय/कीमत/गुणवत्ता में श्रेष्ठता आयी है। कम्प्यूटर का आविष्कार चार्ल्स बेवेज ने किया था, उन्हें कम्प्यूटर का जनक भी कहा जाता है। कम्प्यूटर एक ऐसी मशीन है, जो मानव प्रयुक्त आंकडे, संख्याएं, शब्द, प्रतिमाएं (चित्र), श्रव्य तथा विडियो फिल्म जैसे किसी भी सूचना संरूप को अपने अन्दर संचित कर सकता है तथा उन्हें बहुत ही तीव्र गति से कच्चे माल के रूप में प्रयोग करके तथा संसाधित करके ऐसे रूप में बदलकर प्राप्त करा सकता है, जो आसानी से समझा जा सके।" आज कम्प्यूटर ने मानव जीवन को सुविधा, सरलता, सुव्यवस्था, सर...

वाइडिंग (Winding)

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  वाइडिंग (Winding) परिचयः कई बार ओवर लोड या लघु परिपथ या इनपुट वोल्टेज के अधिक होने पर ट्रांसफार्मर की वाइडिंग जल जाती है, उस समय ट्रांसफार्मर की वाइडिंग करने के लिए निम्न बातों को नोट करना चाहिए। ट्रांसफार्मर का डाटा नोट करना : ट्रांसफार्मर को अवसमन्वायोजन (Disaassemblying) करने से पूर्व निम्नलिखित आंकडे (data) नोटकरने चाहिये। 1..ट्रांसफार्मर की क्रोड का प्रकार अर्थात् क्रोड प्रकार या शैल प्रकार  2.वाइडिंग की संख्या, इनपुट व आऊटपुट वोल्टेज । 3.आउटपुट धारा क्षमता अर्थात् VA क्षमता। 4.संयोजन आरेख, टर्मिनल की पहचान करने के लिए चिन्ह लगायें 5.भार के साथ किस प्रकार संयोजित है। 6.क्रोड का समुच्चय (Assembly) का विवरण, स्टैम्पिंग की संख्या 7.तार का साइज और प्रत्येक कुण्डलन (winding) में अर्थात् प्राइमरी व सैकेण्ड्री वाइडिंग में टनों की संख्या । 8.बडे ट्रांसफार्मर में प्रत्येक परत में टर्न की संख्या 9.इन्सुलेशन में परत, लीड तारे, स्लीव का प्रकार व साईज, बन्धन, वाइडिंग व प्रत्येक परत के बीच इन्सुलेशन का प्रकार व साईज नोट करना चाहिये 10. बाबिन का साईज, दीवार की मोटाई, आकार व किस पदा...

तार, केबल एवं सकेत (Wire, Cable and Symbols )

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  तार, केबल एवं सकेत (Wire, Cable and Symbols ) तार (Wire) :- एक ऐसा चालक जो धारा वहन कर सकता हो, जिसका व्यास समरूप हो, आकार में वृत्तीय हो और उस पर कोई इन्सुलेशन न चढ़ा हो तार कहलाता है। केबल (Cable) :- ऐसा चालक जिस पर पी.वी.सी. या रबड़ इत्यादि इन्सुलेशन की परत चढ़ी हो। यह एक चालक भी हो सकता है या सात चालक भी हो सकते हैं। इस प्रकार इन्सुलेशन की परत चढ़े चालक केबल कहलाते हैं। केबल के भाग (Parts of Cable) :- साधारण केबल के तीन मुख्य भाग होते हैं। (i) चालक  (ii) इन्सुलेशन परत (iii) सुरक्षा परत चालक (Conductor) : - एक ऐसी शुद्ध धातु जो धारा के मार्ग में कम विद्युत प्रतिरोध उत्पन्न करती है चालक कहलाती है। यह चालक पदार्थ ही धारा को एक सिरे से दूसरे सिरे तक प्रवाहित करता है। चूंकि तांबे की चालकता एल्यूमिनियम की अपेक्षा अधिक है फिर भी इसके अधिक मूल्य व कम उपलब्धता के कारण एल्यूमिनियम का उपयोग आजकल अधिक बढ़ गया है क्योंकि भार में कम होने के साथ - साथ एल्यूमिनियम का प्रति किलो ग्राम मूल्य भी तांबे से बहुत कम है। धारा का मान चालक की मोटाई के साईज को तय करता है। इन्सुलेशन परत (Insulation...

अर्थिंग (Earthing)

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  अर्थिंग (Earthing)  भू-सम्पर्कन (EARTHIG) (1) विद्युत झटके से बचाव (Safety From Electric Shock):- विद्युत संस्थापन में जब कभी नंगा तार किसी उपकरण जैसे प्रेस, हीटर, विद्युत केटली, कूलर या धातु के स्विच बोर्ड इत्यादि की बॉडी सम्पर्क में आता है तो वह उपकरण अपनी बाडी सहित संजीवित हो जाता है और उपकरण के किसी भाग से पूर्णतया सम्पर्क होने पर मनुष्य को घातक विद्युत झटका लग सकता है और सम्पर्क में आये हुए व्यक्ति की मृत्यु भी उसी समय हो सकती है। साधारणतया विद्युत झटके का प्रभाव निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है (i) शरीर में से गुजरने वाली धारा। (ii) शरीर के किसी महत्वपूर्ण अंग का विद्युत के सम्पर्क में आना। (iii) विद्युत सम्पर्क का समय। (iv) प्रदाय A.C. या D.C. का प्रभाव चूंकि मनुष्य शरीर का प्रतिरोध भिन्न-भिन्न व्यक्तियों के लिए भिन्न-भिन्न होता है इसलिए जब शरीर के पार्श्व में वोल्टता आरोपित होती है तो उस वोल्टता के अनुसार शरीर में धारा का मान प्रवाहित होता है। चूंकि मनुष्य के शरीर की चमडी (Skin) के कारण प्रतिरोध का मान निर्भर करता है, सुखी अवस्था में 120000 से 500000 के बीच हो सक...

विद्युत एवं इसके मूल सिद्धांत

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विद्युत एवं इसके मूल सिद्धांत (Electricity and its Fundamental Laws) परिचय (Introduction) उष्मा एवं प्रकाश की तरह विद्युत भी एक प्रकार की ऊर्जा है जो दिखाई नहीं देती परन्तु इसकी उपस्थिति इसके प्रभावों से ज्ञात हो जाती है। विद्युत हमेशा रही है और रहेगी इसे नष्ट नहीं किया जा सकता न उत्पन्न किया जा सकता है केवल विभिन्न विधियों से इसका रूपान्तरण करके इसका उपयोग किया जाता है। विद्युत के प्रकार (Types of Electricity) विद्युत दो प्रकार की है। (i) स्थिर विद्युत (Static Electricity) (ii) गतिज विद्युत (Dynamic Electricity)   स्थिर विद्युत (Static Electricity) वैज्ञानिकों के शोध से ज्ञात है कि धातुओं में इलैक्ट्रोन छोड़ने व अधातुओं में इलैक्ट्रोन ग्रहण करने की प्रवृत्ति होती है। अतः यदि कांच को रेशम से रगड़ने पर कांच की छड़ के स्वतन्त्र इलैक्ट्रोन रेशम पर चले जाएँगे तो कांच पर इलैक्ट्रोन कम होने व प्रोटोन अधिक होने से यह छड़ धन आवेशित और रेशम ऋण आवेशित हो जाएगी। इसके विपरीत यदि एबोनाइट की छड़ को फलालेन से रगडा जाए तो एबोनाइट की छड़ ऋण आवेशित हो जाएगी और यह ऋण आवेश एबोनाइट की छड़ में तब तक रहे...

प्रत्यावर्ती धारा का दिष्ट धारा में परिवर्तन व इनवर्टर (Conversion from AC To DC and Invertor)

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प्रत्यावर्ती धारा का दिष्ट धारा में परिवर्तन व इनवर्टर (Conversion from AC To DC and Invertor सामान्यतया जनन, ट्रांसमिशन व वितरण में AC का सबसे अधिक उपयोग है इसके कई कारण हैं परन्तु फिर भी कुछ विशेष कार्यों में DC की आवश्यकता पडती है, AC को DC में परिवर्तित करना कनवर्सन कहलाता है। कुछ विशेष कार्य जिनमें DC की आवश्यकता पडती है वह निम्नलिखित है- 1. बैट्री का आवेशन (Charging of Batteries) 2. विद्युत लेपन व परिष्करण जैसे रासायनिक क्रियायें । 3. इलैक्ट्रोनिक उपकरणों की पावर सप्लाई इत्यादि ।  कुछ विशेष कार्य हैं जिनमें DC अधिक लाभदायक है वो निम्नलिखित है- (a) ट्रैक्सन (b) टेलीफोन, रिले व टाइमर स्विच के उपयोग (c) चाल नियन्त्रण में DC मोटरें अधिक दक्ष होती हैं इसलिए जहाँ पर चाल का नियन्त्रण आवश्यक होता है वहाँ DC मोटरों के लिए DC सप्लाई की आवश्यकता पडती है। निम्नलिखित विधियों से AC को DC में परिवर्तित किया ता सकता है। ( i) मोटर जनित्र सेट  (ii) रोटरी कनर्वटर (iii) मरकरी आर्क रैक्टीफायर  (iv) मैटल रैक्टीफायर  (v) अर्द्ध चालक डायोड और SCR उपरोक्त विधियों में रोटरी कनवर्टर, मरक...

व्यावसायिक व औद्योगिक वायरिंग

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व्यावसायिकवऔद्योगिक   वायरिंग (Commercial and Industrial Wiring) कन्डयूट वायरिंग प्रणालियां :- इस प्रणाली को दो भागों में बांटा गया है, जो इस प्रकार है :-  (1) सतही कन्डयूट वायरिंग  (2) कन्सील्ड कन्डयूट वायरिंग (a) सतही कन्डयुट (Surface Conduit Wiring) :- यह प्रणाली निम्न व मध्यम वोल्टता वाली वायरिंग अधिष्ठापन में प्रयोग की जाती है। इसमें अधिकतर लोहे के कन्डयूट में P.V.C. केबल का उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग अधिकतर कार्यशालाओं में किया जाता है, क्योंकि लोह कन्डयूट यान्त्रिक सुरक्षा प्रदान करता है। स्थान विशेष पर इस प्रकार की वायरिंग के लिए सर्वप्रथम ले आऊट बना कर सामान की मात्रा का अनुमान लगाया जाता है और आवश्यकता अनुसार लोह के कन्डयूट के टुकडे जिनमें जंक्शन बाक्स में कसने के लिए चूड़ी कटी होती हैं, लकडी की पट्टियों द्वारा दीवार पर सेडल द्वारा कसे जाते हैं और आवश्यकता अनुसार शेष जंक्शन इत्यादि लगा कर कन्डयूट में तारों को स्टील तार जिसे फिश तार (Fish Wire) कहते हैं, की सहायता से आवश्यक तारों को खींचा जाता है। कन्डयूट का आकार इसमें डलने वाली तारों की संख्या अनुसार ...

विद्युत शक्ति का संचारण

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  विद्युत शक्ति का संचारण (Transmission of Electrical Power) विद्युत शक्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिये अर्थात् संचारण और वितरण की मूलतः दो विधियाँ हैं- (1) प्रत्यावर्ती धारा प्रणाली (AC system) (2) दिष्ट धारा प्रणाली (DC system) (1) प्रत्यावर्ती धारा प्रणाली की विशेषतायें- विद्युत ऊर्जा का अधिकतम भाग AC में ही संचारण व वितरण किया जाता है। AC प्रणाली की निम्नलिखित विशेषतायें हैं- (i) प्रत्यावर्ती धारा प्रदाय को 33 kv तक की उच्च वोल्टता में पैदा किया जा सकता है जबकि DC प्रदाय को उच्च वोल्टता में जनेरेट करना सरल नहीं है। (ii) AC मशीनें DC मशीनों की अपेक्षा बनावट में सरल, सस्ती व टिकाऊ होती है। (iii) AC में वोल्टता को ट्रांसफॉर्मर द्वारा सरलता से उच्च व निम्न कर सकते हैं जबकि DC में ऐसा सम्भव नहीं है। प्रत्यावर्ती धारा के दोष- । अतः इस प्रणाली में ताँबा या एल्यूमीनियम की बचत हो सकती है। 3. डी.सी. में त्वाचिक प्रभाव (skin effect) नहीं होता अत: चालक का सम्पूर्ण अनुप्रस्थ क्षेत्र उपयोग होता है। 4. डी.सी. प्रणाली में प्रेरकत्व धारित्र व कला विस्थापन समस्यानहीं होती 5. डी...

विद्युत उपसाधन

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विद्युत उपसाधन मानव जीवन को सरल व आरामदायक बनाने में विद्युत का योगदान आज के युग में किसी से भी छुपा नहीं है। प्रतिदिन मनुष्य अनेक प्रकार के विद्युत उपकरणों का उपयोग करता है। इस अध्याय में प्रतिदिन कार्य में आने वाले उपसाधनों का वर्णन किया जा रहा है। उष्मा उत्पन्न करने वाले उपसाधन (Heating Appliances) : जूल के नियमानुसार जिस चालक में धारा प्रवाहित होती है उसमें उष्मा भी उत्पन्न होती है। यह उत्पन्न उष्मा Hal2Rt होती है। अतः समीकरण में ध्यान देने से मालूम होता है कि यदि किसी चालक का प्रतिरोध अधिक होगा तो उसमें उष्मा उत्पन्न होगी। इसलिए कुछ विशेष उपसाधनों में जिनमें उष्मक घटक (Heating Element) प्रयोग किया जाता है। उसका प्रतिरोध चालक तारों की अपेक्षा अधिक होता है। अतः इस उद्देश्य के लिए निम्न प्रकार के उष्मक पदार्थ प्रयोग किए जाते हैं। केन्थाल (Kanthal ) : यह क्रोमियम, निकल व लोहे की मिश्र धातु होती है। जो विभिन्न अनुपात में मिलाकर विभिन्न उद्देश्यों के लिए तैयार की जाती है। इस मिश्र धातु का कार्यकारी उच्चतम तापक्रम 1280°C होता है और प्रतिरोधकता P20 135 cm होती है। गलनांक 1510°C होता है। इ...

अर्द्ध चालक युक्तियों द्वारा मोटर कन्ट्रोल

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  अर्द्ध चालक युक्तियों द्वारा मोटर कन्ट्रोल (Motors control by semiconductor devices) पावर ट्रांजिस्टर (Power Transistor) : पूर्व सेमेस्टर में हम थायरिस्टर के बारे में अध्ययन कर चूके हैं, थायस्टिर की अपेक्षा ट्रॉजिस्टर की स्विचिंग स्पिड अधिक है और स्विचिंग हानियाँ भी कम होती है। थायस्टिर को टर्न ऑफ करवाने के लिए महंगे कम्यूटेशन सर्किट की आवश्यकता पडती है परन्तु ट्रांजिस्टर को आसानी से टर्न ऑफ कम लागत पर कर सकते हैं। चूंकि ट्रांजिस्टर की वोल्टेज व करंट रेटिंग थायस्टिर से कम होती है, इसलिए सामान्यतया ट्रांजिस्टर का उपयोग मध्ययम शक्ति उपयोगों में किया जाता है। शक्ति ट्रांजिस्टर के निम्नलिखित प्रकार है: 1. बाइपोलर जंकशन ट्रांजिस्टर (Bipolar Junction transitor 2. मैटल ऑक्साइड फिल्ड इफैक्ट ट्रांजिस्टर (Metal Oxide field effect transistor (MOSFET)) 3. इन्सुलेटिड गेट बाइपोलर ट्रांजिस्टर (Insulated gate bi- polar transistor (1G BT) 1. बाइपोलर जंक्शन ट्रांजिस्टर (BJT): BJT तीन परत वाली अर्द्ध चालक युक्ति है। यह दो N प्रकार व एक P प्रकार परत हो सकती है तब यह NPN ट्रांजिस्टर कहलाता है, यदि द...

विद्युत अनुरक्षण

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  विद्युत अनुरक्षण (Electrical Maintenance ) परिचय :- किसी मशीन, उपकरण व प्लांट इत्यादि को कम मूल्य से संतोषजनक व दक्षतापूर्वक चलाने के लिये जो व्यवस्था की जाती है यह व्यवस्था अनुरक्षण (Mantenance) कहलाती है। मशीनों के अनुरक्षण होने के पश्चात् भी कुछ विशेष कारणों से क्षति पहुँच जाती है, इस प्रकार की क्षतिग्रस्त मशीन में सुधार कार्य करना पड़ता है, इस प्रकार के सुधार कार्य को मरम्मत (repair) कहते हैं। अनुरक्षण के उद्देश्य : मशीनों में उचित अनुरक्षरण के निम्नलिखित उद्देश्य हैं- 1. उत्पादन (Production) के समय उपयंत्र के खराब होने की सम्भावना कम हो जाती है। 2. अनुरक्षण लागत घटती है। 3. मशीन या उपकरण संतोषजनक व सुरक्षित परिचालन के लिये तैयार रहता है। 4. मशीन खराब होने के बाद भी पुन: शीघ्र ठीक करने में समय कम लगता है। 5. मशीनों व प्लॉट की दक्षता बढ़ती है। 6. उत्पादन बढ़ता है व लागत घटती है। 7. मशीन या उपकरण का अनुरक्षण सही रहने से ऑपरेटर प्रसन्न रहता है। मशीनें लगातार सही प्रकार कार्य करती रहे इनके दक्ष परिचालन के लिये निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिये  : 1. प्रतिदिन मशीनों की...