इलैक्ट्रिशियन के औजार



इलैक्ट्रिशियन के औजार

इलैक्ट्रिशियन के कार्य को सुरक्षित व सरल बनाने के लिए औजारों का बहुत महत्व है। इस अध्ययाय में औजारो का उपयोग की जानकारी प्रस्तुत की गई है। निम्नलिखित महत्वपूर्ण औजार एक इलैक्ट्रिशिन की टूल किट में आवश्यक रूप से होने चाहिए।

1. पेचकस (Screw Driver) - ये अनेक प्रकार के होते हैं जैसे- फ्लैट-टिप, क्रास टिप, यू-टिप इत्यादि। इनका आकार इनके शक या ब्लेड़ की लम्बाई के आधार पर व्यक्त किया जाता है। सामान्यतः 5 सेमी. से 30 सेमी. शैंक वाले पेचकस प्रयोग किये जाते हैं।

पेचकस का उपयोग विभिन्न प्रकार के पेंचों को कसने व खोलने के लिए किया जाता है। इनके मुख्य भाग हैं - बिट, शैंक या ब्लेड़ और हैन्डिल |

पेचकस




सावधानियाँ

1. नोक को घिसकर नुकीला नहीं बनाना चाहिए।

2. पेचों के साइज और आकार के अनुसार पेचकस उपयोग करना चाहिए।

3. इसे छैनी की भाँति प्रयोग नहीं करना चाहिए।

4. पेचकस का हैन्डिल उचित इन्सुलेशन वाला और मजबूत होना चाहिए।


2. कम्बीनेशन प्लायर (Combination Plier) :- 

ये प्राय: 15 सेमी. तथा 20 सेमी. लम्बाई में बनाये जाते हैं। इलैक्ट्रिशियन के लिए सबसे उपयोगी साईज 20 सेमी. लम्बाई और इन्सुलेटिड दस्ते वाला कम्बीनेशन प्लायर उपयोगी रहता है। इनका उपयोग एल्यूमीनियम तथा ताँबे के पतले तारों को काटने, उनका इन्सुलेशन छीलने तथा तारों के जोड़ों को ऐंठने के लिए किया जाता है।



सावधानियाँ :-

1. इससे स्टील की तारें नहीं काटनी चाहिए।

2. इसका उपयोग हथौड़े की भाँति नहीं करना चाहिए।

3. इन्सुलेशन ठीक होने पर ही लाइव वायर पर प्रयोग करना चाहिए। 4. इससे गर्म पदार्थ नहीं पकड़ना चाहिए।

3. लॉंग नोज प्लायर (Long Nose Plier) :- यह पतले तारों को पकड़ने व मरोड़ने और छोटे-छोटे नटों को कसने व खोलने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका आगे का भाग लम्बा होता है। मुँह चौरस और गोल होता है। चौरस मुँह वाले को फ्लैट लौंग नोज और गोल मुँह वाले को राउन्ड लौंग नोज प्लायर कहते हैं। इसका हैंडिल इन्सुलेटिड होता है और ये 10 सेमी. और 15 सेमी. के होते है



सावधानियाँ :-

1. इससे बड़े नटों को नहीं खोलना चाहिए।

2. इसके आगे के भाग पर अधिक बल नहीं लगाना चाहिए।

3. समय-समय पर इसके रिबट जोड़ में तेल डालना चाहिए।

4. साइड कटिंग प्लायर (Side Cutting Plier) :- यह तारों को काटने और इसका इन्सुलेशन छीलने के लिए प्रयोग किया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेन्ट्स सोल्डर करने के बाद फालतू सिरे काटने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है। इसके जबड़े पर एक तरफ कटर होता है और इसी भाग से तारों को काटा जाता है। ये 10 सेमी. व 15 सेमी. के साईजों में मिलते हैं। इलैक्ट्रिशियन को इन्सुलेटिड साईड कटर उपयोग में लाना चाहिए।




सावधानियाँ :-

1. इससे स्टील की तारें नहीं काटनी चाहिए।

2. इससे लोहे की पत्ती नहीं काटनी चाहिए।

5. पोकर (Pocker or Bradawl) :- इसे लकड़ी में गाइड होल या हल्का छेद करने के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसका आगे का भाग जो लम्बा नुकीला होता है, चौकोर होता है और शेष भाग पेचकस की तरह होता है । हैन्डिल गोल मुँह वाला होता है। ये 10, 15 और 20 सेमी. के साईजों में मिलते हैं।

चित्र 


सावधानियाँ :-

1. इसका सिरा अधिक नुकीला और गोल नहीं होना चाहिए। 2. इसके द्वारा सख्त या मोटी लकड़ी में छेद नहीं करना चाहिए। 3. धातुओं पर इसे प्रयोग नहीं करना चाहिए।

6. फेज टैस्टर (Phase Tester) :- इसका उपयोग 'फेज' टेस्ट करने के लिए किया जाता है। जब जनीन पर खड़ा व्यक्ति इसकी कैप को स्पर्श करता हुआ इसकी टिप को फेज तार या पिन से स्पर्श करता है तो इसमें लगा नियोन लैम्प चमक उठता है। ये 500 वोल्टस तक कार्य करने के लिए बनाये जाते हैं।



सावधानियाँ :-

1. इससे बड़े पेच खोलने का कार्य नहीं करना चाहिए।

2. 500 वोल्ट से अधिक वोल्टता पर इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।

7. हथौड़ा (Hammer) :- अनेक यान्त्रिक भागों को ठोकने पीटने के काम के लिए हथौड़े का उपयोग किया जाता है इलैक्ट्रिशियन के कार्य के लिए अधिकतर बाल पेन हथौड़ा उपयोग में लाया जाता है। यह कास्ट स्टील का बना होता है। इसके मुख्य भाग फेस, चीक, हैंडिल और पेन व आई-होल होते हैं। फेस और पेन भाग को टैम्परिंग द्वार कठार कर लिया जाता है परन्तु चोट को सहन करने के लिए इसके चीक भाग को मुलायम रखा जाता है। यह 100 ग्राम से 1 किलोग्राम तक भार के प्रयोग किये जाते हैं। बाल पेन हैमर के अतिरिक्त क्रास पेन, स्ट्रेट पेन, रिवेटर्स हथौड़ा, बढ़ई का कला हथौड़ा और स्लेज हैमर प्रयोग किये जाते हैं।



सावधानियाँ :-

1. हैन्डिल को कसा हुआ और मजबूत रखना चाहिए। 

2. हथौड़े के किसी भाग पर चिकनाई नहीं होनी चाहिए।

 3. हथौड़े को हैन्डिल के अन्तिम सिरे से पकड़कर चलाना चाहिए। 

4. हैन्डिल के ढीले होने पर उपयोग में नहीं लेना चाहिए।

 

8. सेन्टर पंच (Center Punch) :- प्राय: यह एक छोटी पृथ्वी की तरह का होता है और स्टील का बना होता है। इसकी लम्बाई 10 से 15 सेमी. होती है। इसका उपयोग धात्विक शीटों में छिद्र करने से पूर्व चिह्न लगाने के लिए किया जाता है, जिससे ड्रिल द्वारा उचित स्थान पर छेद है


चित्र 



सावधानियाँ

1. इसे सुम्बी की तरह उपयोग में नहीं लेना चाहिए।

2. इसकी नोक को गर्म नहीं करना चाहिए।

9. छैनियाँ (Chisels) :- ये मुख्यतथा दो प्रकार की होती है:- (i) फरमर चिजेल (Firmer Chisel ) :-

ये 6. 12, 18, व 25 mm के साईजों में मिलती है। इसका उपयोग ना लकड़ी के राउण्ड ब्लॉक, बोर्ड इत्यादि से फालतू लकड़ी के कटे भाग किय को अलग करने के लिए किया जाता है। इसका ब्लेड कास्ट स्टील स्टील का बना होता है



सावधानियाँ

1. इसे पेचकस की भाँति उपयोग नहीं करना चाहिए।

2. हमेशा इसका उपयोग मैल्ट के साथ करें।

3. इसे वाटर स्टोन पर घिसे तथा धार लगाने के लिए आयल स्टोन का उपयोग करना चाहिए।

4. इसे बिना हैन्डिल के उपयोग न करें।

5. इसे वहाँ पर उपयोग न करें जहाँ पर कीलें गढ़ी हों।

(ii) फलैट कोल्ड चिजेल (Flat Cold Chisel) :- ये 18, 20, 25 mm के साइजों में उपलब्ध होते हैं। ये हाई कार्बन स्टील की बनी होती हैं। इनका कटिंग एंगल 300 से 450 के बीच होता है। इसका कटिंग ऐज हार्डन्ड व टेम्पर्ड किया होता है। इलैक्ट्रिशियन इसका उपयोग दीवारों में गिट्टियाँ लगाने के लिए या होल बनाने में करता है। लम्बाई में ये 15, 20 सेमी. की होती हैं। विशेष कार्य के लिए इनकी लम्बाई भी बढ़ाई जा सकती है। यदि इसकी लम्बाई एक मीटर हो जाए और इसका सिरा थोडा मुड़ा हो तो यह क्रो बार द्धसब्बलऋ कहलाएगी।




सावधानियाँ :-

1. इसका वर्किग ऐज (Working Edge) सही होना चाहिए। 2. यदि काम में लेते समय इसके हैड़ का आकार मशरूम की तरह हो जाए तो इसे ग्राइन्डर पर घिस लेना चाहिए।

3. इसके हैड़ पर ग्रीस व तेल नहीं लगा होना चाहिए।

10. हैन्ड - ड्रिल मशीन व बिट्स (Hand Drill Machine And Bits) :- यह 6 mm की क्षमता के लिए बनाई जाती है। इसका उपयोग लोहे की पत्तियों या लकड़ी और बैकेलाइट में छेद करने के लिए किया जाता है। इसमें टविस्ट ड्रील का उपयोग किया जाता है।




सावधानियाँ

1. मशीन के घूमने वाले भागों को लुबरीकेट करके रखना चाहिए। 2. ड्रिल बिट सही और मजबूती के साथ इसके चक में कसी होनी चाहिए।

3. ड्रिल करने से पूर्व कार्य पर सेन्टर पंच से पंच करें।

4. यदि बड़ा छेद करना है तो पहले छोटे साईज का ड्रिल का उपयोग करें और बाद में बड़ा ।

5. ड्रिल को कार्य से लम्बवत् रखना चाहिए।

6. छोटे ड्रिल बिट पर अधिक प्रेशर नहीं डालना चाहिए। 7. वाइब्रेशन व झटकों से बचाना चाहिए।

8. ड्रिलींग पूरा होने के पश्चात् हैन्डिल को सीधा ही घुमाते रहें और मशीन को ऊपर खींच ले तो ड्रिल बाहर आ जाएगा।

(11) रैचट ब्रेस मशीन (Ratchet Brace Machine) :- यह सामान्यतया 6 mm क्षमता की होती है। यह विशेषतया लकड़ी में ऐसी जगह जैसे कोने इत्यादि में छेद करने के लिए उपयोग में लाई जाती है। इसमें पेचकस की बिट लगाकर पेचों को कसने व ढीले करने के लिए भी इसे उपयोग में लाया जाता है|




12. जमूर (Pincer) :- यह 100, 150 और 200 mm के साईजी में उपलब्ध होता है। इसका उपयोग लकड़ी में से कीलें निकालने के लिए किया जाता है। इसका साईज इसकी पूरी लम्बाई से मापा जाता है।
 सावधानियाँ :-
1. इसको हैमर की तरह उपयोग नहीं करना चाहिए।

13. जिमलेट (Gimlet) :- ये 3 से 10 mm तक के होल करने के लिए बनते हैं। लकड़ी में छोटे छेद करने के लिए इसे उपयोग में लाया जाता है। इसकी बिट पेचदार नोक होती है और उसी पर हैन्डिल लगा होता है।


सावधानियाँ :-
1. इसे हैन्डिल के बिना उपयोग में नहीं लाना चाहिए।
2. इसे कील पर उपयोग नहीं करना चाहिए।
3. जब छेद कर रहे हो तो इसे सीधा रखना चाहिए अन्यथा इसका पेचदार हिस्सा टूट जाता है।
14. राठल प्लग टूल व बिट (Rawl Plug Tool And Bit) :- ये 8, 10, 12, व 14 नम्बर की मिलती हैं। इसके दो भाग होते हैं जिनमें एक टूल बिट तथा दूसरा होल्डर कहलाता है। इसकी टूल बिट कार्बन स्टील तथा होल्डर नरम इस्पात की बनी होती है। इसका उपयोग ईंट व कंकरीट की दीवार या छत में छेद करने के लिए किया जाता है, इसके द्वारा बने छेद में फाईबर, लकड़ी या पी.वी.सी. के प्लग लगाए जाते हैं जिन्हें केसिंग केपिंग, बैटन या बोर्ड इत्यादि पेचों द्वारा कसे जाते हैं।


सावधानियाँ :-
चित्र 2.14
1. जब दीवार या छत में छेद करना है तो प्रत्येक हैमर की चोट के साथ इसे थोड़ा घुमा भी देना चाहिए।
2. इसे धातु पर उपयोग न करें।
3. इसे जमीन पर पटकना नहीं चाहिए।

15. हैण्ड सा (Hand Saw) :- यह 250mm, 300mm में मिलती है। यह एक पतले स्टील ब्लेड़ द्वारा बनी होती है जिस पर प्रति इंच 5 से 8 दाँत होते हैं। यह मोटी लकड़ी काटने के लिए उपयोग में लाई जाती है। इसके साईज का निर्धारण इसके ब्लेड़ की कुल लम्बाई से किया जाता है।


सावधानियाँ :-
चित्र 2.15
1. इसे जंग से बचाना चाहिए।
2. ढीले हैन्डिल के साथ इसे उपयोग में नहीं लाना चाहिए।
3. इसके दाँति धारदार होने चाहिए
4. इसे हमेशा सीधा काम में लेना चाहिए।
5. जब इसे कार्य में न ले रहे हो तो इस पर ग्रीस न ले रहे हों तो इस पर ग्रीस लगा कर चाहिए।
6. जहाँ कील गढ़ी हाँ वहां पर इसे उपयोग में नहीं लेना चाहिए 7. इसे समान गति से उपयोग में लायें।

16. टेनन सा (Tennon Saw) :- ये साधारणतया 200, 23 300 mm के साइजों में उपलब्ध हैं। इसमें प्रति इंच 8 से 12 दाँत तथा ब्लेड की चौड़ाई 10 cm होती है। इसका ब्लेड ऊपर से मुद्दा ताकि ब्लेड काटने के समय मुड़े नहीं। यह लकड़ी के पतले टुकड़े। बैटन, केसिंग केपिंग इत्यादि काटने के लिए उपयोग में लाई जाती है



17. हैक्सा (Hack Saw) :- ये कन्डुयट पाईप, जी.आई. पाईप लोहे के छोटे टुकड़े काटने के लिए काम में लाया जाता है। ये 200 तथा 300mm के साईजों में मिलता है। ये दो प्रकार के होते हैं (1) फि हैक्सा और (ii) ऐडजस्टेबल हैक्सा। ऐडजस्टेबल हैक्सा में विभिन्न के ब्लेड प्रयोग कर सकते हैं। इसके मुख्य भाग फ्रेम, ब्लेड, डि फ्लाई नट हैं। इसका ब्लेड़ इस प्रकार डिजाईन किया जाता है कि यह के स्ट्रोक में लोहे को काटता है अतः ब्लेड़ को इस प्रकार फिक्स जाता है कि इसके दाँत हैन्डिल से आगे की तरफ होते हैं।


सावधानियाँ :-

1. ब्लेड पर्याप्त रूप से कसा होना चाहिए।
2. लोहे को काटते समय कूलेंट का उपयोग करें।
3. ब्लेड के दाँते हैन्डिल की ओर से आगे की तरफ होने चाहिए। 4. काटते समय ब्लेड़ सीधा रहना चाहिए अन्यथा ब्लेड़ टूट सकता है। 5. आगे के स्ट्रोक पर पर्याप्त दबाव रखें ताकि ब्लेड़ के दाँते काट सकें। 6. वापिस स्ट्रोक के समय ब्लेड़ को थोड़ा-सा उठा लेना चाहिए। 7. बहुत शीघ्रता से स्ट्रोक नहीं चलाने चाहिए।

18. टैस्ट लैम्प (Test Lamp) :- एक होल्डर के साथ लैम्प लगा होता है, इसी लैम्प को टेस्ट लैम्प कहते हैं। इसे सप्लाई टेस्ट करने के लिए उपयोग में लाया जाता है।


सावधानियाँ :-
1. इसे ताँबा, एल्यूमिनियम या टिन के अतिरिक्त अन्य कठोर धातुओं पर उपयोग नहीं करना चाहिए।
2. इसे कील ठोकने के लिए भी उपयोग नहीं करना चाहिए।

19. मैलट (Mallet) :- ये 0.5 Kg से 1.00 Kg में उपलब्ध होते हैं। यह कठोर लकड़ी या सेलुलाईड से बने होते हैं। इसका उपयोग विद्युत मोटरों को एसेम्बल करते समय किया जाता है, इसके अतिरिक्त फरमर चिजल पर व पतले धातु के चद्दरों को मोड़ने के लिए भी किया जाता है।

सावधानियाँ :-
यह सही तरीके से अर्थ होना चाहिए।
2. इसमें नम्य तार (FLE X IBLE Wire) उपयोग करनी चाहिए।
3. इसे लोहे के स्टैण्ड पर रखना चाहिए।

20. कॉपर बिट काहिया (Copper Bit Soldering Iron Ordinary) :- यह साधारणतया 0.250 Kg में मिलता है। इसमें एक लोहे की छड़ पर ताँबे का नुकीला बिट फिट किया होता है जिसके दूसरे सिरे पर लकड़ी का हैन्डिल लगा होता है! कॉपर बिट सर्वप्रथम फरनेस या अंगीठी पर गर्म किया जाता है और उसके बाद ज्वाईंट को सोल्डर करने के काम आता है
सावधानियाँ :
1. सोल्डरिंग से पहले इसकी बिट को साफ करके टिन कर लेना
चाहिए।
2. इसे अति तप्त नहीं करना चाहिए।

21. विद्युत काहिया (Electric Soldering Iron) :- 125 और 250 W, 230 Volt की क्षमता के उपलब्ध होते हैं। यह छोटे जोड़ व कम्युटेटर सेगमेन्ट्स को टाँका लगाने के काम आता है। इस पर एक तांबे की बिट लोह छड़ के साथ फिक्स रहती है और लोह भाग विद्युत एलिमेन्ट द्वारा गर्म होता है।

सावधानियाँ :-
1. होल्डर की कैप के नीचे तार की एक गांठ लगा लेनी चाहिए। 2. उपयोग में लेते समय सावधानी से उपयोग करें अन्यथा यह टूट सकता है।




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